जांजगीर चाम्पा - ‘मैनपाट’ का एकदिवसीय शैक्षणिक भ्रमण : अघोर विद्यापीठ के विद्यार्थियों को कराया गया छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाने वाला ‘मैनपाट’ का एकदिवसीय शैक्षणिक भ्रमण
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta / Wed, Feb 4, 2026 / Post views : 170
अघोर विद्यापीठ के विद्यार्थियों को कराया गया छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाने वाला ‘मैनपाट’ का एकदिवसीय शैक्षणिक भ्रमण
अकलतरा, 2 फरवरी 2026 अघोर विद्यापीठ पोड़ी दल्हा अकलतरा में विद्यालय के अध्यक्ष श्री गोपाल राम जी एवं प्राचार्या श्रीमती अंजली दीक्षित के कुशल निर्देशन में छात्रों को 2 फरवरी 2026 सोमवार को शैक्षणिक भ्रमण एवं पिकनिक हेतु छत्तीसगढ़ का शिमला ‘मैनपाट’ ले जाया गया। अघोर विद्यापीठ के संस्थापक परम श्रद्धेय बाबा जी श्री कापालिक धर्म रक्षित राम जी से आशीर्वाद लेकर बच्चे शिक्षकों की देखरेख में रविवार की रात्रि 11: 00 बजे मैनपाट के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं का पूर्ण ध्यान रखा गया। समय-समय पर उन्हें स्वल्पाहार एवं प्रसाधन उपलब्ध कराए गए। बच्चे मैनपाट भ्रमण हेतु बहुत ही उत्साहित थे और वहां के प्राकृतिक वातावरण से तारतम्य स्थापित करना उनके लिए बहुत ही कौतूहल पूर्ण था।छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित यह पर्यटन स्थल मुख्य शहर अंबिकापुर से लगभग 75 किमी दूर है। मैनपाट (Mainpat) को इसकी ठंड और प्राकृतिक सुंदरता के कारण "छत्तीसगढ़ का शिमला" और "मिनी तिब्बत" कहा जाता है। प्राचार्या ने बच्चों को बताया कि मैनपाट को 'मिनी तिब्बत' कहे जाने के मुख्य कारण:
यहां रहने वाले तिब्बती शरणार्थी है जिन्हें 1962 में चीन के साथ युद्ध के बाद यहाँ बसाया गया था, जिन्होंने इस जगह को अपना घर बना लिया।
बौद्ध मठ और संस्कृति: यहाँ कई तिब्बती मठ, प्रार्थना ध्वज और बौद्ध मंदिर हैं जो तिब्बती संस्कृति की झलक दिखाते हैं। यह विंध्य पर्वत शृंखला पर 3,781 फीट की ऊंचाई पर है। विद्यार्थियों को मैनपाट में विभिन्न स्थानों का भ्रमण कराया गया जिनमें से यहाँ का मुख्य आकर्षण केंद्र बौद्ध मंदिर, तिब्बती संस्कृति, के विषय में ऐतिहासिक जानकारी प्रदान की गई। यहाँ का बौद्ध मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। पर्यटक स्थलों में 'उल्टा पानी: यहाँ पानी नीचे के बजाय ऊपर की ओर बहता हुआ प्रतीत होता है। 'जलजली’ (दलदलीजमीन) लगभग 2-3 एकड़ में फैली यह जमीन गद्दे की तरह हिलती (स्पंजी) है। और 'टाइगर पॉइंट' जलप्रपात यहाँ ऊंचे पहाड़ से गिरता झरना है। फिश पॉइंट: मनोरम दृश्यों के साथ रंगीन मछलियां यहां की प्राकृतिक सुंदरता को और भी बढ़ाता है। गर्मियों में भी यहाँ का मौसम ठंडा रहता है और सर्दियों में यहाँ कड़ाके की ठंड पड़ती है इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है और यहां भ्रमण पर जाने से पर्यटकों को शिमला के भौगोलिक वातावरण जैसा ही अनुभव प्राप्त होता है क्योंकि यहाँ का मौसम साल भर सुहावना रहता है। विद्यालय के विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के साथ इस शैक्षिक भ्रमण पर बहुत ही आनंद एवं उत्साह का अनुभव हुआ और विभिन्न जानकारियां भी उन्होंने प्राप्त हुई। प्राचार्या श्रीमती अंजली दीक्षित ने समय-समय पर उनका मार्गदर्शन किया एवं वहां के ऐतिहासिक जानकारियों से बच्चों को अवगत कराती रहीं। मैनपाट के रिसोर्ट में बच्चों के भोजन की उत्तम व्यवस्था भी की गई। मैनपाट से वापस आते हुए बच्चों को अंबिकापुर की प्रसिद्ध महामाया मंदिर का भी दर्शन करवाया गया बच्चों को बताया गया कि इस मंदिर का निर्माण महाराजा रघुनाथ शरण सिंह देव द्वारा 1889 और 1917 के बीच नागर शैली में करवाया गया था।स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह एक प्राचीन शक्तिपीठ है। कहा जाता है कि माता सती का धड़ यहाँ गिरा था, और अंबिकापुर शहर का नाम भी माता अंबिका के नाम से रखा गया जिन्हें आज हम मां महामाया के रूप में पूजते हैं। यह स्थान छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। इस प्रकार बच्चों को इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विभिन्न पर्यटन स्थानों एवं ऐतिहासिक जानकारियां भी प्राप्त हुई। इस प्रकार सुखद अनुभव के साथ बच्चे अंताक्षरी खेलते हुए अपने नगर वापस आ गए।
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta
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