: कवर्धा। जिले में वास्तविक रूप से देखा जाए तो बिना किसी रिश्वत की ऐसा कोई भी सरकारी दफ्तर नहीं है जहां घूसखोरी के बगैर काम होता हो।
Admin / Sat, Jan 18, 2025 / Post views : 96
कवर्धा। जिले में वास्तविक रूप से देखा जाए तो बिना किसी रिश्वत की ऐसा कोई भी सरकारी दफ्तर नहीं है जहां घूसखोरी के बगैर काम होता हो।
Lok seva news 24 Bureau Chief - Digvendra Gupta ऐसा ही कुछ मामला जिले के कवर्धा तहसील कार्यालय का सामने आया है जहां पर आवेदन कर्ताओं ने इस घूसखोरी नामक दीमक जैसे कर्मचारियों के खिलाफ हल्लाबोल अपनी नागरिकता का परिचय दिया है। आवेदन करने वालों ने तहसील कार्यालय व अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय कवर्धा के कर्मचारियों के ऊपर छोटे छोटे कार्यों के लिए रुपए की मांग किए जाने का आरोप लगाया है। बताया जाता है पैसे लेने के बाद ही आम जनों का कार्य को आगे बढ़ाने की सिफारिश की जाती है। जब उन कर्मचारियों को राजस्व की आमदनी नहीं कराया जाए तब तक वह उन्हें पेशी तारीख में बढ़ोत्तरी कर परेशान किया जाता है जिससे वह तंग आकर उन्हें रुपए देने में विवश हो जाएं। तहसील कार्यालय में पदस्थ तहसीलदार के लिपिक (बाबू )के ऊपर आरोप है कि वह किसी भी राजस्व से जुड़ी मामले में रुपए 5000 से लेकर 20000 रुपए तक की मांग सामान्य तौर पर करते हैं। तथा अनुविभागीय अधिकारी कवर्धा ( राजस्व ) के कर्मचारी लिपिक सतीश जायसवाल द्वारा डायवर्शन के लिए प्रति फाइल यानी एक जमीन की डायवर्शन कार्य का अनुज्ञा आदेश कराने के लिए 15000 से 30000 रुपए तक की मांग की जाती है। मामला केवल तहसील कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय का ही नहीं है बल्कि शिक्षा विभाग के कर्मचारी जो उधारी के लिए अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में पदस्थ हैं शुभम देवांगन जो कृषि कार्य से जुड़ी हुए त्रुटी पर किसानों से 5000 से अधिक की राशि का मांग करते हैं। छात्र छात्राओं के लिए स्थाई जाति, निवास की शीघ्रता से कराने हेतु रूपये 500 से लेकर 1000 रुपए तक की मांग की जाती है जो कबीरधाम जिला के प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है। आखिर कर आम जनता को सूबे के उप मुख्यमंत्री व कवर्धा विधानसभा विधायक के नाम जिला कलेक्टर कार्यालय में हुई शिकायत पत्र दे न्याय की गुहार लगा रहे हैं। जिला प्रशासन को इस विषय को काफी गंभीरता से लेते हुए जांच कराकर दंडित व प्रशासनिक रूप से भी कार्यवाही करने की आवश्यकता है जिससे समाज में सरकार की प्रति विश्वस्नीयता बनी रहे। संबंधित आरोपित व्यक्तियों का कथन: फर्जी तरीके से आवेदन में लिखा गया है सभी शब्द निराधार हैं, अगर दोषी पाए गए तो कार्यवाही करना सही होगा।
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