कवर्धा न्यूज़ -बढ़ी आमदनी से श्री महेतरदास को मिला संबल, जिम्मेदारियाँ न : सम्मानजनक समर्थन मूल्य ने खेती को बनाया गर्व और स्थिर आय का सशक्त आधार
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta / Fri, Dec 5, 2025 / Post views : 131
सम्मानजनक समर्थन मूल्य ने खेती को बनाया गर्व और स्थिर आय का सशक्त आधार
बढ़ी आमदनी से श्री महेतरदास को मिला संबल, जिम्मेदारियाँ निभाने का बढ़ा विश्वास
कवर्धा, 05 दिसंबर 2025। कभी धान के कम दामों के कारण खेत-खलिहान से लेकर घर-परिवार तक संघर्ष से घिरे किसान आज नए दौर की शुरुआत महसूस कर रहे हैं। सोनबरसा गांव के 68 वर्षीय किसान श्री महेतरदास कोशले इसका जीवंत उदाहरण हैं। जीवन भर खेती को समर्पित रहे महेतरदास कहते हैं पहले खेती सिर्फ पेट भरने का साधन थी, आज सम्मान और स्थिर आय का आधार बन गई है। 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य ने न सिर्फ किसानों की मेहनत का सही मूल्य दिया है, बल्कि उनके जीवन में नई उम्मीद, नई स्थिरता और आत्मनिर्भरता का भरोसा भी जगाया है।
श्री महेतरदास कोशले का जीवन संघर्ष और समर्पण का प्रतीक रहा है। बचपन से ही वे अपने माता-पिता के साथ खेतों में काम करते आए हैं। वे याद करते हैं कि पहले धान का मूल्य इतना कम था कि परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल से हो पाता था। बच्चों की पढ़ाई, त्योहारों के खर्च और शादी-ब्याह जैसे बड़े दायित्व अक्सर चिंता में डाल देते थे। उनका कहना है कि पहले खेती केवल दो वक्त की रोटी का साधन भर थी, कई बार ऐसा भी हुआ कि घर चलाना मुश्किल हो जाता था। वक्त के साथ सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और बेहतर खरीदी व्यवस्था ने किसानों को नई मजबूती दी है। श्री महेतरदास बताते हैं कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी होने से किसानों को पहली बार लगा कि उनकी मेहनत का सम्मान हो रहा है।
श्री महेतर दास ने बताया कि उनके पास कुल चार एकड़ जमीन है, जिसमें वे धान के साथ-साथ गन्ना, अरहर और अन्य फसलों की खेती भी करते हैं। इस वर्ष दो एकड़ में धान की खेती कर उन्होंने समर्थन मूल्य पर इसे बेचा और इससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हुई। वे बताते हैं कि उनकी चार बेटियाँ और एक बेटा है। हाल ही में उन्होंने अपनी बेटी की शादी धूमधाम से की थी, जिसके लिए लिया गया कुछ कर्ज अभी बाकी था। लेकिन बढ़े हुए समर्थन मूल्य ने उनके मन में विश्वास जगाया है कि यह कर्ज भी जल्द ही चुका दिया जाएगा।
श्री महेतर दास कहते हैं कि अब लगता है कि खेती से घर चलाना ही नहीं, जिम्मेदारियाँ भी पूरी हो सकती हैं। धान विक्रय से प्राप्त राशि से अब परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। घर-गृहस्थी में किसी प्रकार की कमी नहीं रहती। परिवार के सभी सदस्य खेती में सहयोग करते हैं और सरकार की विभिन्न कृषि एवं सामाजिक योजनाओं का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। महेतरदास बताते हैं कि आज खेती में पहले की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है, आय स्थिर हुई है और परिवार का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। श्री महेतरदास कोशले ने छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर ने किसानों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है।
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta
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