: अयोध्या - रामनवमी श्रीरामलला के सूर्य तिलक की तैयारी पूरी, ट्रायल सफल. गर्भगृह में ऐसे पहुंचेंगी किरणें
Admin / Wed, Apr 10, 2024 / Post views : 145
17 अप्रैल को दोपहर 12 बजे शुभ संयोग
रामनवमी श्रीरामलला के सूर्य तिलक की तैयारी पूरी, ट्रायल सफल. गर्भगृह में ऐसे पहुंचेंगी किरणें
इस बार रामनवमी पर सूरज की किरणें राम मंदिर में विराजमान भगवान श्री रामलला का अभिषेक करेंगी। किरणें 17 अप्रैल को ठीक दोपहर 12 बजे मंदिर की तीसरी मंजिल पर लगाए गए ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम के जरिए गर्भगृह तक आएंगी। यहां किरणें दर्पण से परावर्तित होकर सीधे रामलला के मस्तक पर 4 मिनट तक 75 मिमी आकार के गोल तिलक के रूप में दिखेंगी। इस सूर्य तिलक को देश के दो वैज्ञानिक संस्थानों की मेहनत से साकार किया जा रहा है। इसकी तैयारी हो चुकी है। मंदिर के पुजारी अशोक उपाध्याय के मुताबिक कुछ दिन पहले सूर्य तिलक के लिए वैज्ञानिक उपकरण गर्भगृह के ठीक ऊपर तीसरी मंजिल पर लगाए गए हैं। रविवार को मध्यान्ह आरती के बाद पहला ट्रायल हुआ तो किरणें रामलला के होठों पर पड़ीं। फिर लैंस को दोबारा सेट कर सोमवार को ट्रायल हुआ तो किरणें मस्तक पर पड़ीं। इससे रामनवमी पर सूर्य तिलक का आयोजन अब तय माना जा रहा है। बता दें कि तीन दिन पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा था कि रामनवमी पर सूर्य तिलक की तैयारी है। इसका प्रसारण 100 एलईडी स्क्रीन्स से पूरे अयोध्या में होगा। इससे पूर्व ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि इस बार सूर्य तिलक संभव हो पाना मुश्किल है। ये एक बॉक्स में छत पर लगा है। इसमें एक बड़ा मुख्य लेंस है, जो बिना बिजली 19 गियर के जरिए काम करेगा। दर्पण 2: ये गर्भगृह में रामलला के मस्तक के ठीक सामने होगा। इसमें सूरज की किरणें तीनों लेंस और पाइप से टकराकर पहुंचेंगी। 2 दर्पण, 3 लेंस, पीतल पाइप और सूर्य के पथ बदलने का सिद्धांत मनमीत । देहरादून. आईआईटी रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग
दर्पण 1
रामनवमी श्रीरामलला के सूर्य तिलक की तैयारी पूरी, ट्रायल सफल. गर्भगृह में ऐसे पहुंचेंगी किरणें
लोक सेवा न्यूज़ 24 सवांददाता
इस बार रामनवमी पर सूरज की किरणें राम मंदिर में विराजमान भगवान श्री रामलला का अभिषेक करेंगी। किरणें 17 अप्रैल को ठीक दोपहर 12 बजे मंदिर की तीसरी मंजिल पर लगाए गए ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम के जरिए गर्भगृह तक आएंगी। यहां किरणें दर्पण से परावर्तित होकर सीधे रामलला के मस्तक पर 4 मिनट तक 75 मिमी आकार के गोल तिलक के रूप में दिखेंगी। इस सूर्य तिलक को देश के दो वैज्ञानिक संस्थानों की मेहनत से साकार किया जा रहा है। इसकी तैयारी हो चुकी है। मंदिर के पुजारी अशोक उपाध्याय के मुताबिक कुछ दिन पहले सूर्य तिलक के लिए वैज्ञानिक उपकरण गर्भगृह के ठीक ऊपर तीसरी मंजिल पर लगाए गए हैं। रविवार को मध्यान्ह आरती के बाद पहला ट्रायल हुआ तो किरणें रामलला के होठों पर पड़ीं। फिर लैंस को दोबारा सेट कर सोमवार को ट्रायल हुआ तो किरणें मस्तक पर पड़ीं। इससे रामनवमी पर सूर्य तिलक का आयोजन अब तय माना जा रहा है। बता दें कि तीन दिन पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा था कि रामनवमी पर सूर्य तिलक की तैयारी है। इसका प्रसारण 100 एलईडी स्क्रीन्स से पूरे अयोध्या में होगा। इससे पूर्व ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि इस बार सूर्य तिलक संभव हो पाना मुश्किल है। ये एक बॉक्स में छत पर लगा है। इसमें एक बड़ा मुख्य लेंस है, जो बिना बिजली 19 गियर के जरिए काम करेगा। दर्पण 2: ये गर्भगृह में रामलला के मस्तक के ठीक सामने होगा। इसमें सूरज की किरणें तीनों लेंस और पाइप से टकराकर पहुंचेंगी। 2 दर्पण, 3 लेंस, पीतल पाइप और सूर्य के पथ बदलने का सिद्धांत मनमीत । देहरादून. आईआईटी रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग
रिसर्च इंस्टीट्यूट ने यह सिस्टम बनाया है। प्रोजेक्ट के वैक देवदत्त घोष के मुताबिक यह सूर्य के पथ बदलने के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें एक रिफ्लेक्टर,
2 दर्पण, 3 लेंस, पीतल पाइप से किरणें मस्तक तक पहुंचेंगी।दर्पण 1
तीसरी मंजिल
लॅस-1
दूसरी मंजिल
लेंस-2
लेंस-3
पहली मंजिल
• रामनवमी को दिन में 12 बजे सूर्य की किरणें तीसरी मंजिल पर लगे सिस्टम के पहले रिफ्लेक्टर पर गिरेंगी। यहां से पहले दर्पण पर जाएंगी और फिर लेंस के जरिए तेजी से आगे बढ़ेंगी।
• वर्टिकल पाइप में 2 और लेंस से गुजरते हुए किरणें गर्भगृह में रामलला के ठीक सामने लगे दूसरे दर्पण पर गिरेंगी।
इस दर्पण को 60 डिग्री में लगाया है, ताकि किरण सीधे मस्तक तक जाए।
गियर सेकंड्स में बदलेंगे किरणों की चाल सीबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप चौहान ने बताया- रामनवमी की तारीख चंद्र कैलेडर से तय होती है। सूर्य तिलक तय समय पर हो, इसीलिए सिस्टम में 19 गियर लगाए हैं, जो सेकंड्स में दर्पण और लेंस पर किरणों की चाल बदलेंगे। बेंगलुरू की कंपनी ऑप्टिका ने लेंस और पीतल के पाइप बनाए हैं। चंद्र और सौर कैलेंडरों के बीच जटिल अंतर की समस्या का हल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स ने निकाला है। रामलला के मस्तक तक ऐसे पहुंचेंगी किरणें।
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